Girish Urkude 2

Untitled – 12

Size – 16 x 16 inches
Medium – Acrylic on mount board

इस चित्र को जब मैं देखता ह ूं। तो लगता है। प्रकृतत में घ मते समय। जूंगलों में कई सारी बेले।
एक द सरे का आधार लेकर। एक वृक्ष पर अपना आचधपत्य जमा रही है।
और उनहीूं के साथ साथ कई सारी छोटी बड़ी बेले। वह भ़ी अपऩी ददशा ढ ूंढते हुए उस पेड पर।
िड रही है। ऐसे दृश्य! मुझे चित्र बनाने के ललए। प्रेररत करते हैं।
कभ़ी-कभ़ी लगता है। यह सारी ि़ीजें मेरे अूंदर ही है। इस़ीललए मैं!
इन रूपों को प्रकृतत में ढ ूंढता ह ूं। वह मोटी पतली लकडडयाूं।
लगता है मेरे चित्र की रेखाएूं हैं। यह रेखाएूं! मेरी चित्र का आधार है।

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