Girish Urkude 3

Untitled- 121
Size – 16 x 16 inches
Medium – Acrylic on mount board

 

प्रकृति के कई सारे रूप हैं। हर व्यक्ति इन रूपों को अपने नजररए से देखिा है।
प्रकृति में ऐसी कई सारी चीजें हैं जो हम देख कर भी अनदेखा करिे हैं।
जो चीजें ज्यादािर हमें आकर्षिि करिी है। वहीीं जादािर याद भी रहिी है।
मैं भी ऐसी कुछ अनदेखी चीजों के िरफ आकर्षिि ह ीं।
यह अनदेखी चीजें ही मुझे चचत्र बनाने के लिए।
प्रेररि करिी है। जैसे स खी िकड़ियाीं, ।टहनीया
स खे पत्ते, ! हवा में िहरा िी घास,
आपस में उिझी हुई टहतनया
झ ड॓ में िगे हुए पे़ि। हवा से उ़ििे हुए कण।
वो सब कुछ जो हम जींगिों में देखिे हैं।
यही सारी चीजें। मेरे चचत्रों का आधार है।
और इस चचत्र में भी! मैंने इनहीीं रुपए को।
प्रकट करने की कोलिि की है।

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